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छत्तीसगढ़ महिला आयोग की 355वीं जनसुनवाई: बहन की आत्महत्या के बाद दहेज़ वापसी और संयुक्त संपत्ति का बंटवारा विवाद जैसे मामलों का हुआ निपटारा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने आज रायपुर स्थित महिला आयोग कार्यालय में महिला उत्पीड़न से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई की। डॉ. नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर यह 355वीं और रायपुर जिले में 171वीं जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान बहन की आत्महत्या के बाद दहेज़ वापसी, संयुक्त संपत्ति का बंटवारा विवाद समेत अन्य मामलों को लेकर सुनवाई और निपटरा किया गया।

1. बहन की आत्महत्या और दहेज की वापसी का मामला

एक मामले में आवेदिका ने बताया कि उसकी बहन ने शादी के केवल दो माह बाद अनावेदक पक्ष की प्रताड़ना के कारण आत्महत्या कर ली। सामाजिक बैठक में आवेदिका और उनके पिता को अपमानित भी किया गया। आयोग की समझाईश और मध्यस्थता के बाद, अनावेदक पक्ष ने मृतक बहन के विवाह में दिए गए सोना-चांदी और दहेज का लगभग 6 लाख रुपए का सामान आयोग के समक्ष आवेदिका को लौटा दिया। इसके अलावा, 25 हजार रुपए नगद भी आयोग के समक्ष प्रदान किए गए। दोनों पक्ष आपसी सहमति से प्रकरण नस्तीबध्द करने पर तैयार हुए।

2. संयुक्त संपत्ति का बंटवारा और पैसे की प्राप्ति

एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि उनके पति की 2013 में मृत्यु हो गई थी और संयुक्त संपत्ति में आवेदिका तथा चारों अनावेदक 1/5 हिस्सेदार थे। संपत्ति के विक्रय के बाद राशि केवल अनावेदक के खाते में जमा हो गई। आयोग में आवेदन प्रस्तुत करने के बाद अनावेदक पक्ष ने 1 लाख 48 हजार रुपए आवेदिका को आयोग के समक्ष प्रदान किए। इसके बाद यह प्रकरण भी निस्तारित कर दिया गया।

3. कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना और आत्महत्या का मामला

एक गंभीर मामले में आवेदिका ने आरोप लगाया कि कॉलेज प्रबंधन की प्रताड़ना के कारण उसकी बेटी ने आत्महत्या कर ली। आयोग की सुनवाई में अनावेदक पक्ष अनुपस्थित रहा। इस पर आयोग ने एमिटी यूनिवर्सिटी के सभी पदाधिकारियों को थाना के माध्यम से उपस्थिति का आदेश दिया। आयोग ने मृतक बेटी के मोबाइल की फॉरेंसिक जांच कराए जाने का आदेश दिया और एस.पी. रायपुर एवं एस.पी. जगदलपुर से अब तक की कार्यवाही की रिपोर्ट मंगवाने का निर्देश भी जारी किया।

4. बी.एस.यू.पी मकान आवंटन का विवाद

एक अन्य मामले में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों ने उनकी मां से बी.एस.यू.पी मकान के एवज में 3,000 रुपए ले लिए थे, लेकिन पिछले 9 वर्षों में मकान आवंटित नहीं किया गया। आवेदिका की मां का निधन हो चुका है और मकान नगर निगम द्वारा 2013 में तोड़ दिया गया। सुनवाई के दौरान अनावेदक पक्ष की ओर से आयुक्त सामान्य प्रशासन विभाग उपस्थित हुए। आयोग ने उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए कि एक माह के भीतर आवास आवंटित किया जाए या उसका स्पष्ट जवाब आयोग को प्रस्तुत किया जाए। डाॅ. किरणमयी नायक ने सभी मामलों में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि महिला आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतें सुनना नहीं है, बल्कि पीड़ितों को न्याय दिलाना और उनके हक का सम्मान सुनिश्चित करना है।

 

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